अक्स तुम्हारा

आज तुमने दिया हुआ कॉफ़ी मग टूट गया
जब से तुम छोड़ गयी हो, तब से इसी में हर सुबह हम कॉफ़ी पिया करते थे
पर लगता है कल से आदत बदलनी पड़ेगी

कुछ हफ़्तों पहले तुम्हारी दी हुई घडी भी खो गयी थी
अभी तक नयी नही खरीदी, पर बोहोत वक़्त ज़ाया कर चुके
अब लग रहा है शायद नयी घडी खरीदनी पड़ेगी

तुमने जो शर्ट दिया था वो भी टाइट होने लगा है
तुमने दी हुई खाली डायरी अब भी खाली है
तुम्हारे साथ बीताये हुए पल आज भी याद करते रहते है
तुम्हारी बातो को online जाके फिरसे पढ़ा करते है

छूटता ही नही है अक्स तुम्हारा…
पर कल वो मग टुटा तो लगा
की बोहोत हो गया, बस;
अब शायद नयी आदतें
नयी यादें
नयी मोहब्बत
और नयी ज़िन्दगी
शुरू करनी पड़ेगी|