उन्होंने कहा “तुम हमे याद नही करते”

प्यार को दिखावे की ज़रूरत क्यूँ होती है?
क्या हमारी आँखों में तुम्हे प्यार दिखाई नही देता?

सबूत क्या दे तुम्हे अपने प्यार का
क्या लम्हों की ख़ामोशी में तुम्हे प्यार सुनाई नही देता
?

माना हर पल तुम्हे याद नही करते
लेकिन हर पल दिल में तुम्हारी यादें होती है |

तो क्या हुआ जो इज़हार नही करते
तुमसे मिलने पे
, चेहरे पर एक चमक सी होती है |

***

आज़मा के देख लो
तुम्हारे लिए कुछ भी कर जाएंगे |

चाहे तो जान मांग के देख लो
मना नही कर पाएंगे
|

कोई ना कहे
तो क्या सच
, सच नही होता?

बस याद नही किया,
तो क्या प्यार, प्यार नही होता?

 

 

Note: People close to me complain a lot that I don’t call or message or stay in touch. It’s like a defect. I don’t know what to do about it. This poem is dedicated to all of them especially my sister Disha and my brother Sahil. And to all my friends who have this complain about my behaviour. I know it must be tough to deal with me. So thank you for sticking around and calling me and messaging me and staying in touch.

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बेगाने

न तुमने हमसे कुछ कहा
न हमने तुमसे कुछ कहा
सब कुछ अजनबियों से कहने लगे
अपनों और अजनबियों में अब फरक ही कहा रहा
|

अधूरी बातें अधूरी रह गयी
अनकही बातो को तो वक़्त ही न मिला ;
सब कुछ कह गया तुम्हारा ज़मीर
हमारी खामोशी को तो मौका ही न मिला
|

बेबस जज़्बात मेरे, मजबूरी में धस गए
दिल की कश्ती को कोई किनारा न मिला ;
बेचैन अफ़सोस मेरे लावारिस हो चले
तुम्हारे चैन
सुकून को लेकिन, उनका ठिकाना न मिला |

गीले शिकवे भी अब किस काम के
इनपे अब हमारा कोई हक़ ही न रहा ;
ये सब तो रिश्तो के नतीजे है
यहाँ तो अब कोई रिश्ता ही न रहा
|

***

अजीब हो चला है वक़्त
हम ज़ाया कर रहे है
,
फिर भी ये बीत नही रहा ;

ज़िन्दगी भी सस्ती हो चली है
हम खर्च कर रहे है
,
पर कोई खरीद नही रहा |

 

इश्क भी बदल रहा है करवट
पहले खुशिया ही खुशिया थी
अब दर्द के सिवा कुछ दिख नही रहा

तुम भी बेगाने से लगने लगे हो अब
पहले तुम्हारी आदतें सही लगती थी
अब तुम्हारी हरकतें
, दिल समझ नही पा रहा |

 

रिश्ते भी कितने अजीब होते है

किसी के साथ प्यार से ज़िन्दगी बिताने की कोशिश करो
तो सालों तक इंसान कोशिश ही करता रह जाता है ;
और उसी इंसान को ज़िन्दगी से निकालने की कोशिश करो
तो कभी कभी ज़िन्दगी भर उस एक इंसान को भुला नही पाता है
|

***

अब क्या नाम दे तुम्हे, समझ नही आ रहा

दोस्तकह नही पा रहे,
दुश्मनदिल को भा नही रहा ;
अनजानेतुम हो नही,
और अजनबीदिल बुला नही पा रहा |

शायद ‘बेगाना’ बुलाना सही रहेगा तुम्हे
क्यूंकि अपना अब तुम्हे कह नहीं सकते ;
बेगाना कहने में भी लेकिन एक अपनापन है
जो चाहे भी तो हम बदल नही सकते
|

ये प्यार ही होगा…

ये प्यार ही होगा
वरना, किसी का इतना इंतज़ार
हम नही करते

ये इश्क़ ही होगा
वरना ऐसी बेवकूफों वाली हरकत
हम नही पटकते |

love in madly

वो तो तुम्हे देख के
हम होश खो बैठते है
और तुम्हारी मुस्कराहट को देख के
दीवाने हो उठते है |

वैसे समझ तो हम में
ज़माने भर की है
और अकड़ तो हम में
ज़रूरत से ज़्यादा भरी है

पर तुम्हे देख के
सारी अकड़ भूल जाती है
और तुमपे रौब जमाने के चक्कर में
सारी समझ निकल आती है |

ये प्यार ही होगा
वरना तुम हमारे दिलो दिम्माग पे
यु छाए ना होते

ये इश्क़ ही होगा
वरना तुम्हारे नाम के इस दिल में
अफ़साने ना होते

ये प्यार ही होगा
या फिर शायद हम पागल हो रहे है |
पर सुना है,
पागल होने को ही लोग आजकल
प्यार कह रहे है |

बस प्यार रह जाता है

समय बीत जाता है
वक़्त भूल जाता है
दर्द कम नही होता
बस नम हो जाता है

आँसू सुख जाते है
दर्द निकल जाता है
जख्म कभी नहीं भरता
बस निशान मिट जाता है

इंसान चला जाता है
रिश्ता टूट जाता है
यादें कभी नहीं भूलती
बस एहसास कम हो जाता है

सब कुछ ख़त्म हो जाता है
हर लम्हा भूल जाता है
कुछ रह जाता है तो वो प्यार है
बस प्यार रह जाता है.

क्या होता…

सोच रहे है,
तुम और हम साथ होते
तो ज़िन्दगी का ठिकाना क्या होता.

प्यार में तुम भी, लाचार होते
तो दिल का फ़साना क्या होता.

केह देते गर हम अपने दिल कि बात,
तो जुर्माना क्या होता.

याद तो तुम्हे कर लेते
पर सोच रहे है, बहाना क्या होता.

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सोच रहे है,
तुम और हम साथ होते
तो इस चांदनी रात का नज़ारा क्या होता.

प्यार में हमारे, तुम क़ुर्बान होते
तो इस दिल कि खुशियो का किनारा क्या होता.

गर गर्दिश में न होते, हमारे नसीब के सितारे
तो जवाब तुम्हारा क्या होता.

पर जब किसी का नहीं हुआ
तो ये वक़्त हमारा क्या होता.