कितना आसान होता है – Privilege, a poem

कितनी आसानी से लोग कह देते है
“चिंता करके कुछ नही होनेवाला| जो हो गया है उसे स्वीकार कर लो”
कभी कभी लगता है,
भगत सिंह ने भी ग़ुलामी बस स्वीकार कर लेनी चाहिए थी|

या जब लोग कहते है
“जो हो रहा है वो उतना बुरा भी नही है”
तो समझ नही आता
की जितना बुरा है, वो भी क्यों सहे|

अपने महफूज़ घर में बैठकर,
मलमल के बिस्तर पे लेटकर,
आराम से कह देना
“सब ठीक हो जाएगा”
कितना आसान होता है|

जब तक हमे तकलीफ नही पोहोच रही
जब तक हमे असुविधा नही हो रही
जब तक हमारे अपनों की जान खतरे में नही है-
शांत रहना,
स्थिरता रखना,
क्तिना आसान होता है|

भारत में रहकर
मुसल्मानो की तकलीफो को अनदेखा कर देना
कितना आसान होता है|
एक आदमी होकर
औरतो पे होनेवाले शोषण को अनदेखा कर देना
कितना आसान होता है|

पर किसी और देश में जब भारतीयों पे हमला होता है,
तब न जाने उन्हें अनदेखा करना
क्यों आसान नही होता है|
जब अपने घर की औरतो पे कोई बुरी नज़र डाले,
तब न जाने उसे बस भूल जाना
क्यों आसान नही होता है|

काश दुसरो के लिए सहानूभूति रखना
भी आसान होता|
काश दुसरो की दिक्कतों को समझना
थोड़ा आसान होता|

और समझ नही पाए
तो कम से कम
उनकी मुश्किलो को यूँ धुत्कारना और अनदेखा कर देना
काश इतना आसान नहीं होता|

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Ek aur raat

एक और रात
यूँ ही गुज़र गयी |
ना तुमने याद किया
ना हमने गुस्ताखी की |

फिर दिल की बात
लफ्ज़ो पे आके रुक गयी |
ना तुम समझ पाएं
ना हमने कोशिश की |

तुमसे मिलने आएं
दिल ने कई बार दरख्वास्त की |
पर ना ग़म मान पाये
ना अश्क़ो ने मंज़ूरी दी |

आँखें बंद कर हम सो गए
सोचा सुबह ज़िन्दगी एक नयी करवट लेगी |
पर ना नसीब बदल पाएं
ना मजबूरियाँ बदली |

 

In English script:

Ek aur raat
Yun hi guzar gyi.
Na tumne yaad kiya,
Na humne gustaakhi ki.

Fir dil ki baat
Lafzo pe aake ruk gyi.
Na tum samajh paayein
Na humne koshish ki.

Tumse milne aaye
Dil ne kai baar darkhwast ki.
Par na gham maan paaye
Na ashqo ne manzoori di.

Aankhe band kar hum so gye
Socha subah zindagi ek nayi karwat legi.
Par na naseeb badal paayein
Na majbooriyaa badli.

उन्होंने कहा “तुम हमे याद नही करते”

प्यार को दिखावे की ज़रूरत क्यूँ होती है?
क्या हमारी आँखों में तुम्हे प्यार दिखाई नही देता?

सबूत क्या दे तुम्हे अपने प्यार का
क्या लम्हों की ख़ामोशी में तुम्हे प्यार सुनाई नही देता
?

माना हर पल तुम्हे याद नही करते
लेकिन हर पल दिल में तुम्हारी यादें होती है |

तो क्या हुआ जो इज़हार नही करते
तुमसे मिलने पे
, चेहरे पर एक चमक सी होती है |

***

आज़मा के देख लो
तुम्हारे लिए कुछ भी कर जाएंगे |

चाहे तो जान मांग के देख लो
मना नही कर पाएंगे
|

कोई ना कहे
तो क्या सच
, सच नही होता?

बस याद नही किया,
तो क्या प्यार, प्यार नही होता?

 

 

Note: People close to me complain a lot that I don’t call or message or stay in touch. It’s like a defect. I don’t know what to do about it. This poem is dedicated to all of them especially my sister Disha and my brother Sahil. And to all my friends who have this complain about my behaviour. I know it must be tough to deal with me. So thank you for sticking around and calling me and messaging me and staying in touch.

बेगाने

न तुमने हमसे कुछ कहा
न हमने तुमसे कुछ कहा
सब कुछ अजनबियों से कहने लगे
अपनों और अजनबियों में अब फरक ही कहा रहा
|

अधूरी बातें अधूरी रह गयी
अनकही बातो को तो वक़्त ही न मिला ;
सब कुछ कह गया तुम्हारा ज़मीर
हमारी खामोशी को तो मौका ही न मिला
|

बेबस जज़्बात मेरे, मजबूरी में धस गए
दिल की कश्ती को कोई किनारा न मिला ;
बेचैन अफ़सोस मेरे लावारिस हो चले
तुम्हारे चैन
सुकून को लेकिन, उनका ठिकाना न मिला |

गीले शिकवे भी अब किस काम के
इनपे अब हमारा कोई हक़ ही न रहा ;
ये सब तो रिश्तो के नतीजे है
यहाँ तो अब कोई रिश्ता ही न रहा
|

***

अजीब हो चला है वक़्त
हम ज़ाया कर रहे है
,
फिर भी ये बीत नही रहा ;

ज़िन्दगी भी सस्ती हो चली है
हम खर्च कर रहे है
,
पर कोई खरीद नही रहा |

 

इश्क भी बदल रहा है करवट
पहले खुशिया ही खुशिया थी
अब दर्द के सिवा कुछ दिख नही रहा

तुम भी बेगाने से लगने लगे हो अब
पहले तुम्हारी आदतें सही लगती थी
अब तुम्हारी हरकतें
, दिल समझ नही पा रहा |

 

रिश्ते भी कितने अजीब होते है

किसी के साथ प्यार से ज़िन्दगी बिताने की कोशिश करो
तो सालों तक इंसान कोशिश ही करता रह जाता है ;
और उसी इंसान को ज़िन्दगी से निकालने की कोशिश करो
तो कभी कभी ज़िन्दगी भर उस एक इंसान को भुला नही पाता है
|

***

अब क्या नाम दे तुम्हे, समझ नही आ रहा

दोस्तकह नही पा रहे,
दुश्मनदिल को भा नही रहा ;
अनजानेतुम हो नही,
और अजनबीदिल बुला नही पा रहा |

शायद ‘बेगाना’ बुलाना सही रहेगा तुम्हे
क्यूंकि अपना अब तुम्हे कह नहीं सकते ;
बेगाना कहने में भी लेकिन एक अपनापन है
जो चाहे भी तो हम बदल नही सकते
|

कोई और दे न दे

अपने दर्द के दलदल में
हम खुद ही अक्सर धसते जाते है |
खुद मुसीबत खड़ी करते है
और खुद ही उसमे फसते जाते है |

दर्द / दुःख
बाँटने से कभी मिटता नहीं |
पर किसी का प्यार साथ हो
तो ये दूर दूर तक दीखता नहीं |

तन्हा कौन नही है इस दुनिया में?
पर अकेला रहना ज़रूरी तो नही |
मुश्किलें है तो क्या हुआ ?
सब लड़ाइयाँ अकेले लड़ी जाए, ऐसी कोई मजबूरी तो नही |

 

एक बात बताये?

तुम्हे युँ दर्द में देख के
अच्छा नही लग रहा |
कुछ कर भी नही पा रहे
कुछ समझ भी नही रहा |

तुम कुछ कहो
तो हमे भी समझ आये,
क्या बीत रही है तुमपे
हम भी समझ पाये |

ज़ोर नही डालेंगे तुमपे
पर तुम्हे तन्हा छोड़ना नही चाहते
तुम्हे इस हालत में देख के
हम भी बस आधे हो जाते |

 

खैर,

जो भी हो, जैसा भी हो
एक बात तुम्हे बता दे,
हम हमेशा देंगे तुम्हारा साथ
कोई और दे न दे |

बस प्यार रह जाता है

समय बीत जाता है
वक़्त भूल जाता है
दर्द कम नही होता
बस नम हो जाता है

आँसू सुख जाते है
दर्द निकल जाता है
जख्म कभी नहीं भरता
बस निशान मिट जाता है

इंसान चला जाता है
रिश्ता टूट जाता है
यादें कभी नहीं भूलती
बस एहसास कम हो जाता है

सब कुछ ख़त्म हो जाता है
हर लम्हा भूल जाता है
कुछ रह जाता है तो वो प्यार है
बस प्यार रह जाता है.

सपने

सपने हम भी देखते है
बस किसी से कहते नहीं
दुनिया हम भी जितना चाहते है
बस कोशिश ज़्यादा करते नहीं

अरमान हमारे भी दिलो में है
बस ध्यान उनकी तरफ देते नहीं
पर चाहे जितना धुत्कार दे
दिलो में सिमटकर, ये सपने रहते नहीं

क्योँ कोई करेगा हमारे सपनो पे भरोसा
कोई सबूत अपनी काबिलियत का
हम कभी दे नहीं पाये
एक तुम ही थे, हमारे अस्तित्व का सहारा
एक तुम्हारी उम्मीदो का बोझ भी
हम उठा नहीं पाये

ना जाने क्योँ अब भी देखते है हम सपने
ना ही इनके पर है,
ना ही पर के नीचे हवा
ना जाने कहा बचे है वो अपने
जिन्हे अब भी हम पे यकीं है
जिन्हे है हमारे सपनो पे भरोसा

बदलती ज़िन्दगी

Rains

Rains

ये बारिश की बूँदें
गीली मिट्टी की खुशबू
पल पल तड़पती, बेचैन
मेरे तन्हा दिल की आरज़ू

बचपन की यादें
पहले बारिश की भिगन
माँ के हाथ के पकौड़े
रेडियो पे पुराने गानो का चलन

बेझिझक बारिश में नाचता,
मेरा मासूम बचपन
बेपरवाह खेलता, गाता
मेरे दोस्तों का संघटन

आज भी भीगने का मन करता है
पर वक़्त की कमी का बहाना होता है
जानते है मन की ख़ुशी सबसे बड़ी होती है
पर ख़ुशी से कीमती, हाथ की घडी होती है

जेब में कुछ पैसे है
बस्ते में कुछ चीज़ें है
मन में डर बीमारी का है
कंधो पे बोझ ज़िम्मेदारी का है

गीली मिट्टी की खुशबू अब भी हमको भाति है
पर कमरे से ही अब, ये बारिश सुहाती है
बचपन के बेफिक्र दिनों की कमी खलती है
पर शायद इसी तरह से, ये ज़िन्दगी बदलती है.

काश

काश कोई हमे गले लगा जाए
काश कोई हमे अपना बना जाए

कर ले कोई हमसे, प्यार भरी बातें
भीड़ में देता रहे, मीठी मुस्कुराहटें

काश कोई हमसे, हमारा हाल पूछ जाए
बैठ कर हमारे साथ, हमारी सूझ-बूझ बढ़ाये

जिस की यादों में है हमारे ये दिन बीतें
काश वो भी हमारे साथ, इस प्यार की बारिश में भीगें

काश ये वक़्त, इस लम्हे में थम जाए
सारे सवालो के जवाब, इस पल में हम पाये

जिन से होती है
पल दो पल की मुलाकातें
काश वो हमारे नाम कर जाए,
अपनी ज़िन्दगी की बची हुई सासें.

तुम बस

तुम बस एक कदम आगे तो लो, बाकी का रास्ता हम तय कर लेंगे
तुम बस नज़रे उठा के देख तो लो, आँखों ही आँखों में बातें हम कर लेंगे
तुम बस एक बार इशारा तो करो, बिन कहे सारी बातें हम समझ जायेंगे
तुम बस प्यार का इज़हार तो करो, इस दुनिया से तो हम अकेले ही लड़ जायेंगे.

तुम बस मांग के तो देखो, आसमां से तारे भी हम तोड़ लायेंगे
तुम बस एक बार चाह के तो देखो, हर चाहत को तुम्हारी हम पूरा कर दिखाएँगे
तुम बस आरज़ू बयां तो करो, सारी जन्नतें तुम्हारे कदमो में ला गिराएंगे
तुम बस प्यार कर के तो देखो, प्यार कि सारी कस्मे हम निभाएंगे.

तुम अरमान बयां तो करो, उन्हें पूरा करने का ज़िम्मा हम उठाएंगे
तुम कभी आज़मा के तो देखो, दुनिया कि सारी हद्दे हम पार कर जायेंगे
तुम कभी भरोसा कर के तो देखो, हम इस भरोसे के लिए जान भी दे जायेंगे
तुम हमपे प्यार का दाव लगा के तो देखो, तुम्हे ज़िन्दगी कि बाज़ी हम जीतवाएंगे.

तुम एक बार हाथ थाम लो, ज़िन्दगी भर का साथ हम निभाएंगे
तुम कभी अपना ग़म बाट के देखो, उसे दूर नहीं तो कम हम कर दिखाएँगे
तुम अपनी खुशियों में शामिल तो करो, उन्हें दुगना हम कर दिखाएँगे
तुम बस हम से प्यार करो, हम इसी एहसास की बदौलत ख़ुशी से मर जायेंगे.