कोई और दे न दे

अपने दर्द के दलदल में
हम खुद ही अक्सर धसते जाते है |
खुद मुसीबत खड़ी करते है
और खुद ही उसमे फसते जाते है |

दर्द / दुःख
बाँटने से कभी मिटता नहीं |
पर किसी का प्यार साथ हो
तो ये दूर दूर तक दीखता नहीं |

तन्हा कौन नही है इस दुनिया में?
पर अकेला रहना ज़रूरी तो नही |
मुश्किलें है तो क्या हुआ ?
सब लड़ाइयाँ अकेले लड़ी जाए, ऐसी कोई मजबूरी तो नही |

 

एक बात बताये?

तुम्हे युँ दर्द में देख के
अच्छा नही लग रहा |
कुछ कर भी नही पा रहे
कुछ समझ भी नही रहा |

तुम कुछ कहो
तो हमे भी समझ आये,
क्या बीत रही है तुमपे
हम भी समझ पाये |

ज़ोर नही डालेंगे तुमपे
पर तुम्हे तन्हा छोड़ना नही चाहते
तुम्हे इस हालत में देख के
हम भी बस आधे हो जाते |

 

खैर,

जो भी हो, जैसा भी हो
एक बात तुम्हे बता दे,
हम हमेशा देंगे तुम्हारा साथ
कोई और दे न दे |

क्या होता…

सोच रहे है,
तुम और हम साथ होते
तो ज़िन्दगी का ठिकाना क्या होता.

प्यार में तुम भी, लाचार होते
तो दिल का फ़साना क्या होता.

केह देते गर हम अपने दिल कि बात,
तो जुर्माना क्या होता.

याद तो तुम्हे कर लेते
पर सोच रहे है, बहाना क्या होता.

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सोच रहे है,
तुम और हम साथ होते
तो इस चांदनी रात का नज़ारा क्या होता.

प्यार में हमारे, तुम क़ुर्बान होते
तो इस दिल कि खुशियो का किनारा क्या होता.

गर गर्दिश में न होते, हमारे नसीब के सितारे
तो जवाब तुम्हारा क्या होता.

पर जब किसी का नहीं हुआ
तो ये वक़्त हमारा क्या होता.